थाना पहुंचे PM ने किया पुरे थाने को सस्पेंड

मैला कुर्ता और धोती पहने एक किसान थाने जा पहुंचा। फटे हाल किसान को एक रिपोर्ट लिखवानी थी। किसान दरोगा से मिलकर अपनी चोरी की रिपोर्ट लिखवाना चाह रहा था, लेकिन दरोगा थाने में नहीं थे। वहां मौजूद पुलिस कर्मी में मामला पूछा तो उसने बताया की मेरी जेब काट ली गयी है और जेब में काफी पैसे थे। पुलिस कर्मी ने कहा की ऐसे थोड़े रिपोर्ट लिखी जाती है। इस पर गुहार लगा रहा किसान बोला की मेरठ का रहने वाला हूँ खेती किसानी करता हूँ। यहाँ पर सस्ते में बैल खरीदने के लिये आया हूँ, जेब में कई सौ रुपये थे, पुलिस कर्मी खीजते हुए बोलता है की इतनी दूर आये हो, पैसा जेब कतरों नें मारा है या गिर गया है इसका क्या सबूत है।

किसान फिर गुहार लगाता है और अपना दुखड़ा सुनाता है की कैसे उसने बैल खरीदने के लिये पैसे जुटाये थे घर जाकर क्या जबाब देगा, लेकिन थाने में मौजूद पुलिस कर्मी एक नहीं सुनते हैं और रिपोर्ट लिखने से मना कर देते हैं। इतने में दरोगा पहुँच जाते हैं, और पूरा वाक्या दरोगा को सुनाया जाता है। दरोगा भी 2-4 उट-पटांग सवाल करते हैं और रिपोर्ट नहीं लिखतें हैं।

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मायूस होकर किसान थाने से लौटने लगता है और गेट पर पहुँचता है। उसी समय एक सिपाही किसान के पास दौड़ते हुए आता है और कहता है की रिपोर्ट लिख जाएगी लेकिन खर्चा पानी देना पड़ेगा। रिपोर्ट लिख जाएगी ये सुनकर किसान के चेहरे पे मुस्कान आ जाती है। रिपोर्ट लिखने के लिये किसान से 100 रुपये मांगे जाते हैं लेकिन इस पर मोल भाव होता है और बात 35 रुपये पर तय हो जाती है। किसान से 35 रुपये दिए और रिपोर्ट किखी जाने लगती है।

मुंशी ने किसान से पूछा की बाबा हस्ताक्षर करोगे या अंगूठा लगोगे किसान बोले की हस्ताक्षर करूँगा, ये कहने के बाद किसान ने पेन उठाया और हस्ताक्षर कर दिया उसके बाद टेबल पर रखे हुए पैड को खिंचा ये देखकर मुंशी सोच में पड़ गया की हस्ताक्षर कर दिया अब पैड क्यों उठा रहा है। किसान ने अपने मैले कुर्ते की जेब से मुहर निकल कर कागज़ पर ठोंक दी जिस पर लिखा था प्रधानमंत्री भारत सरकार ये देख कर पुरे थाने में हडकंप मच गया।

रिपोर्ट की कॉपी पर प्रधानमंत्री की मुहर देख कर पूरा थाना सन्न रह गया। दरसल ये किसान थे उस समय के प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह। साल 1979 में उत्तर प्रदेश के इटावा के एक थाने के शिकायत पर प्रधानमंत्री औचक निरिक्षण पर पहुँच गए थे। जैसे ये खबर जिले के अफसरों तक पहुंचती है तो पुरे अफसरों का महकमा थाने में पहुँच जाता है।

थाने की भ्रष्ट ब्यवस्था को देख कर तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह पुरे थाने को सस्पेंड कर देते हैं। उन्होंने अपने काफिले को थाने से कुछ दूर छोड़ दिया था और भेष बदल कर फटे हाल किसान बन गए थे और  धोती कुर्ते में नंगे पैर थाने पहुंचे थे, ताकि कोई उनको पहचान न सके बताया जाता है की तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह इसी तरह औचक निरिक्षण करते थे। चौधरी साहब को किसानों का नेता कहा जाता था, हालाँकि प्रधानमंत्री के पद पर उनका कार्यकाल एक साल तक भी नहीं रह पाया। साल 1980 में हुए लोकसभा चुनाव में इंदिरा गाँधी के पद पर वापसी कर ली थी।

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